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    Saturday, 26 March 2016

    7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लेकर वित्त मंत्रालय के इंस्पेक्टरों में नाराजगी


    केन्द्र सरकार के लिए हर साल करीब सात लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व वसूलने वाले वित्त मंत्रालय के इंस्पेक्टरों को 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लेकर नाराजगी तो है ही, लेकिन उनकी बातों को ठीक से न सुनने के लिए अपने अधिकारियों के खिलाफ ज्यादा रोष है। इनका कहना है कि आजादी के बाद से अभी तक अन्य इंस्पेक्टरों के बराबर वेतन लेने वाले वित्त मंत्रालय के इंस्पेक्टरों को अब कम वेतन मिलेगा।

    सातवें वेतन आयोग ने वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले आय कर विभाग, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग, सीमा शुल्क विभाग और सेवा कर विभाग केइंस्पेक्टरों को पीबी 2 के ग्रेड पे 4,600 रुपये के अनुरूप रिप्लेसमेंट देने की सिफारिश की गई है जबकि सीबीआई, आईबी, दिल्ली पुलिस आदि के लिए पीबी 2 के तहत ही 4,800 रुपये के ग्रेड पे के अनुरूप रिप्लेसमेंट देने की सिफारिश की गई है।

    वित्त मंत्रालय केतहत काम करने वाले इंस्पेक्टरों का कहना है कि 7वें वेतन आयोग की इस सिफारिश से उनका मनोबल टूटेगा क्योंकि इसका असर सिर्फ वेतन पर ही नहीं बल्कि रूतबे पर भी पड़ेगा। अभी तक तो उन्हें लगता है कि सीबीआई या आईबी में काम करने वाले इंस्पेक्टर उनके अनुरूप ही हैं।

    आयकर विभाग में ग्रूप बी गजटेड अधिकारियों एवं ग्रुप सी कर्मचारियों के ज्वाइंट कमेटी ऑफ एक्शन और इनकम टैक्स इम्पलायीज फेडरेशन के अशोक कुमार कन्नोजिया का कहना है कि उन्हें वेतन आयोग से ज्यादा तकलीफ तो अपने अधिकारियों से है। एक तो उन्होंने शुरू में ही अपने इंस्पेक्टरों की बात को मजबूती से नहीं रखा। इसके बाद जब रिपोर्ट सार्वजनिक हुई तो फिर से जब सभी विभागों को अपनी बातें रखने का अवसर मिला। इस दौरान भी टालमटोल का रवैया अपनाया जा रहा है। 

    उनके मुताबिक पहले तो केन्द्रीय राजस्व सचिव ने ही मिलने का समय नहीं दिया। काफी दिन बाद पिछले दिनों उन्हें मंत्रालय में बुलाया गया और बात तो सुनी गई। लेकिन अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। बात सिर्फ इंस्पेक्टरों की ही नहीं बल्कि आयकर विभाग में तो आयकर अधिकारी (आईटीओ) को भी इसी तरह से निराश किया गया है। कन्नोजिया का कहना है कि आय कर विभाग, सेवा कर विभाग, सीमा शुल्क विभाग और केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में करीब 32,000 इंस्पेक्टर काम करते हैं। केन्द्र, सरकार के करीब 7 लाख करोड़ रुपये का राजस्व वसूलने में इनकी भूमिका ही सबसे ज्यादा होती है। जब इनका मनोबल ही ऊंचा नहीं होगा तो फिर वे काम कैसे करेंगे। उनका कहना है कि आजादी के बाद से ही वित्त मंत्रालय के इंस्पेक्टरों का कद गृह मंत्रालय के इंस्पेक्टरों के बराबर रहा है जिसे अब कम किया जा रहा है। अमर उजाला

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